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इंसानियत लापता हैं, मिले तो हिंदुस्तान के पते पर भेजना.....
February 29, 2020 • Admin

(जी.एन.एस., लकी जैन) दि.28
दिल्ली जल रही है, किसी की दुकान जली, तो किसी का मकां जला, किसी का लख्ते जिगर मरा तो किसी का लाडला और इन सबके बीच मरता रहा इंसान और मरती रही इंसानियत। मजहब और धर्म के नाम पर व्यस्ततम इलाके को सन्नाटे में बदल दिया गया। जो दिखा उसे गोली मार दी गयी। सरेराह कत्लेआम हुआ….. लेकिन बचाने न तो पुलिस आई और न ही नेता….
देश की 100 करोड़ जनता ने क्या इसी हिंदुस्तान का सपना और अच्छे दिनों की ख्वाहिश की थी…? क्या यही है गुजरात मॉडल…?
छोटे-छोटे सपनों में खुश होने वाले आम आदमी ने क्या देश में इसी गुजरात मॉडल को मांगा…? 2002 में गुजराती जिस दहशत और दर्द से गुजरे थे, वो दर्द तो दिल्ली वासियों ने मांगा नहीं था…! तो फिर यह दर्द उन्हें दिया गया…?
27 जिंदगियों के साथ न जाने कितने ही घरों में अंधेरा हो गया है। यह लोग कभी न भूल पाने वाली इस दहशत से कभी बाहर नहीं आ सकेंगे। इनके सामने यह सवाल हमेशा रहेगा कि कौन थे वो दहशतगर्द…? पड़ोस के हुसैन साहब तो नहीं थे…! न ही दूसरे पड़ोसी के शर्मा जी थे…! तो फिर कौन थे यह दहशतगर्द…?