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रामायण मानस चरित्र का काव्य ग्रंथ है.. ब्रहमचारी महावीरदास
February 29, 2020 • Admin

नरसिंहपुर। भगवान श्रीराम भारत भूमि के मर्यादा पुरूषोत्तम के नाम से जाने जाते है। उन्होँने घर परिवार राजपाठ प्रकृति  सहित अन्य जीव-जन्तुओं के साथ भी बहुत ही मर्यादित व्यवहार किया हैं। उन्होंने कभी भी नियम और मर्यादाओं के बंधनों को नहीं तोड़ा हैं। भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन रामायण में है। रामायण समस्त नागरिकों के लिए जीवन जीने के लिए आदर्श आचार संहिता के रूप में महावीर दास ब्रमहचारी महाराज ने ग्राम मचवारा में चल रहे रामचरित्र मानस सम्मेलन में बताया। इस सम्मेलन में कथा व्यास डॉ राम पाल त्रिपाठी ने वर्तमान शासन प्रशासन व्यवस्था की तुलना करते हुय बताया कि मनु स्मृति में भी चार बर्ण है और संबिधान में भी चार बर्ण है। ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य शूद्र और संबिधान के भी अनुसार चार बर्ण जनरल, पिछड़ा अनुसूचित जाति जनजाति चार ही बर्ण है। मनुस्मृति की महत्ता यह थी कि उसमें योग्यता और क्षमता अनुसार व्यक्ति अपना वर्ण और कर्म  बदल सकता था । समाज में कोई किसी प्रकार का भेदभाव नहीं था समतामूलक प्रतिभा अनुसार कार्य विभाजन किया गया था। उस समय कोई बेरोजगार नहीं था। आरक्षण भी नहीं था पर अब आरक्षण होते हुए सभी वर्ग बेरोजगार हैं, तो श्रेष्ठ कौन सी बात हुई। फिर भी मलेच्छो और विधर्मी के प्रभाव में आकर विदेशी राष्ट्रों के षड्यंत्र में घिरकर भोले भाले जन अनजाने में ही मनु स्मृति को जलाने का पाप कर बैठते हैं। भगवान श्रीराम का जीवन एक आदर्श चरित्र है।