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वित्त मंत्री मनप्रीत बादल का घेराव करने पहुंचे अकाली
February 29, 2020 • Admin

(जी.एन.एस) ता. 28
चंडीगढ़
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल आज विधानसभा में 2020-21 का बजट पेश करेंगे। वहीं अकाली दल की तरफ से मनप्रीत बादल के घर का घेराव कर प्रदर्शन किया जा रहा है। इस प्रदर्शन में खुदकुशी कर चुके किसानों के पीड़ित परिवार भी शामिल है, जिसका समर्थन अकाली दल द्वारा किया जा रहा है। इस दौरान पुलिस और अकाली विधायकों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। मौके पर अकाली विधायक बिक्रम मजीठिया और शरणजीत ढिल्लो को उठा ले गई। वहीं पंजाब विधानसभा की कार्रवाई 20 मिनट के लिए स्थगित किया गया है। गौरतलब है कि अगले माह 17 मार्च को कैप्टन सरकार के 3 साल पूरे होने वाले है और सरकार अपने किए गए वायदों को पूरी तरह से अमल में नहीं ला पाई है, जिसके चलते बजट सत्र के दौरान आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल सरकार के प्रति अक्रामक रूख अपनाए हुए है।
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने घर- घर नौकरी का नारा देकर वादा किया था कि हर साल 1.61 लाख लोगों को नौकरियां देगी। यह भी कहा गया था कि जब तक नौकरी नहीं मिलती तब तक 2500 रुपए बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने कई जिलों में रोजगार मेले लगाए मगर नौकरी दिलाने के लक्ष्य को भेद नहीं पाई। माली हालत के कारण सरकार बेरोजगारों को वादे के मुताबिक बेरोजगारी भत्ता देने में भी असमर्थ है। चुनाव के दौरान स्मार्टफोन देने का वादा करते हुए कांग्रेस ने युवाओं से फॉर्म भरवाए थे अब तक उनमें से किसी को भी फोन नहीं मिला है। 2017 के बजट में पैसा रखने के बावजूद अब तक स्मार्टफोन नहीं मिले। देश के लोकतंत्र से वाकिफ प्रदेश के युवा भी शायद इसकी उम्मीद छोड़ चुके हैं। अब ऐसा मान लिया जाए कि कैप्टन ने सत्ता में आने से पहले युवाओं के वोट बैंक को हासिल करने के लिए झूठ का सहारा लिया था।
कांग्रेस ने अकाली-भाजपा सरकार को माफिया की सरकार साबित करने की कोशिश की थी। इसमें पार्टी ने दावा किया था कि प्रदेश में लोकतांत्रिक नहीं बल्कि रेत, केबल, शराब, ड्रग्स और ट्रांसोपर्ट माफिया का राज है। जिसे कांग्रेस सरकार बनने पर तुरंत खत्म किया जाएगा। पंजाब में केबल कारोबार भी पहले जैसा ही चल रहा है और शराब और ट्रांसपोर्ट के कारोबार में भी कहीं कोई अंतर नहीं दिख रहा। कैप्टन सरकार ने पंजाब में दलितों के सशक्तिकरण के लिए बेघरों को मकान, 50 हजार रुपए तक कर्ज माफ करने जैसे वादे किए थे जो जमीन पर पूरे होते नहीं दिख रहे हैं। बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों की पैंशन को 1500 रुपए करने का वादा किया गया था लेकिन पहले से मिल रहे 500 रुपए पैंशन भी लगातार नहीं मिल पा रही थी। हालांकि अब इस पैंशन को 500 से बढ़ाकर 750 रुपए कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि 2 साल के दौरान राज्य में सार्वजनिक कल्याण की सभी योजनाएं लगभग ठप्प हैं। कप्तान ने अकाली-भाजपा सरकार की प्रतिष्ठित आटा-दाल योजना के साथ चाय पत्ती और चीनी देने का वादा किया था। लेकिन अब तक केवल लोगों को केवल गेहूं ही मिल पा रहा है। इस योजना में दाल, चीनी और चायपत्ती अब तक नहीं मिली।